माता सीता के जीवन के बारे में कुछ अनसुने सत्य

माता सीता के बारे में तो हम सभी जानते हैं। माता सीता रामायण का मुख्य पात्र हैं। सीता मिथिला के राजा जनक की ज्येष्ठ पुत्री थी। उनका विवाह श्री राम से हुआ था। माता सीता एक आदर्श नारी थी। वह एक अच्छी पुत्री, आदर्श पत्नी तथा उच्च चरित्र वाली महिला थी। माता सीता को देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है। उनके बारे में कुछ ऐसे सत्य हैं जिन्हें ज्यादातर लोग नही जानते हैं। आज हम ऐसे ही कुछ तथ्यों पर नजर डालेंगे।

1. रामचरित मानस में सीता माता का जिक्र कुल 147 बार हुआ है।

2. रामचरित मानस में सीता के स्वयंवर का उल्लेख है लेकिन वाल्मीकि रामायण में उनके स्वयंवर के बारे में नही बताया गया है।

3. वाल्मीकि रामायण के अनुसार माता सीता का विवाह बाल्यवस्था में ही हो गया था। उनके विवाह के समय उनकी आयु केवल 6 साल थी।

4. वाल्मीकि रामायण के अनुसार माता सीता विवाह के 12 साल बाद श्री राम के साथ अयोध्या में रहीं।

5. 18 वर्ष की उम्र में माता सीता श्री राम के साथ वनवास चली गयी थी।

6. विवाह के पश्चात् माता सीता कभी अपने मायके जनकपुर नही गयी। वनवास जाने से पहले पिता जनक ने देवी सीता को जनकपुर ले जाने का प्रस्ताव रखा परन्तु देवी सीता ने मना कर दिया।

7. तुलसीदास ने लिखा है कि मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को श्री राम और सीता माता का विवाह हुआ था। लेकिन रामायण में ऐसा कुछ नही बताया गया है।

8. वाल्मीकि रामायण के अनुसार सीता का हरण रावण ने अपने रथ में किया था। वह दिव्य रथ सोने का बना हुआ था। लेकिन तुलसीदास ने लिखा है कि रावण सीता माता के हरण के पश्चात उन्हें अपने पुष्पक विमान से लंका ले गया था।

9 . रावण जब सीता माता का हरण कर के उन्हें लंका ले गया तो उसके बाद देवी सीता को 435 दिन लंका में रहना पड़ा था।

10. वाल्मीकि रामायण के अनुसार सीता के हरण के पश्चात देव इंद्र ने ऐसी खीर बनाकर माता सीता को खिलाई कि जब तक सीता माता को लंका में रहना पड़ा उन्हें भूख-प्यास ही नही लगी। लेकिन तुलसीदास ने इस बारे में कोई वर्णन नही किया है।

11. रावण के पास देवी सीता नही बल्कि उनकी प्रतिछाया थी। जब तक माता सीता लंका में रही तब तक उनका असली रूप अग्नि देव के पास रहा।

12. माता सीता जब लंका से लोटी उनकी आयु 33 वर्ष थी।

13. लंका से लौटकर 33 वर्ष की आयु में देवी सीता को महारानी का पद मिला।

14. वाल्मीकि रामायण में ऐसा उल्लेख किया गया है कि जब देवी सीता ने लव और कुश को वाल्मीकि आश्रम में जन्म दिया, उस समय उनके सबसे छोटे देवर शत्रुघ्न उसी आश्रम में मौजूद थे।

15.श्री राम ने जल समाधि लेकर देह का त्याग किया था जबकि माता सीता सशरीर ही परलोक चली गयी थी।

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